Monday, June 13, 2011

बाबा रामदेव ने अंततः संत समुदाय के कहने पर अनशन का त्याग कर दिया

बाबा रामदेव ने अंततः संत समुदाय के कहने पर अनशन का त्याग कर दिया लेकिन उन्होंने सत्याग्रह ख़त्म नहीं करने की बात भी कही है। रामदेव देश में भारत स्वाभिमान यात्रा करते रहे हैं। उन्होंने इस दौरान अपने योग शिविरों का उपयोग भ्रष्टाचार तथा कालेधन के मुद्दे पर भाषण देने के लिये भी किया। हमारे जैसे योग साधकों के लिये बाबा रामदेव एक योग प्रचारक के कारण हमेशा ही दिलचस्पी का विषय रहे हैं। यह बात तो उनके आलोचक भी मानते हैं कि योग के प्रचार में उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। जब बाबा ने राजनीतिक दल बनाने की घोषणा की तो यकीनन उनको आधुनिक लोकतंत्र व्यवस्था में विरोधियो का सामना करने के लिये तैयार होना चाहिए था। ऐसा लगता है कि वह योग शिविरों में अपनी जयजयकार के ऐसे अभ्यस्त हो गये हैं कि उनको इस बात का अनुमान नहीं था कि अंततः लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोधियों का सामने होना न केवल स्वाभाविक वरन् आवश्यक भी है।
ऐसा लगता है कि स्वामी रामदेव ने भी राजनीति की तरफ कदम बिना किसी शास्त्र का अध्ययन किये ही बढ़ाया है। ऐसा ही दूसरे लोग भी कर रहे हैं अंततः कम से कम एक बात तय रही है कि राजनीतिक विषय पर वह आमजन जैसे ही हैं यह अलग बात है कि योग शिक्षा का अध्यात्म से जुड़े होने के कारण वह प्रसिद्धि हो गये और इसी कारण राजनीति उनके लिये सुविधाजनक हो गयी है।
वह भले ही भारतीय अध्यात्म ग्रंथों की बात करते हैं पर लगता है कि कौटिल्य का अर्थशास्त्र तथा चाणक्य नीति का अध्ययन उन्होंने अभी नहीं किया है। इन महापुरुषों की रचनायें न केवल राजनीति बल्कि जीवन में सुचारु रूप से आगे बढ़ने का ऐसा संदेश देती हैं जिनकी सच्चाई उनको पढ़कर देखा जा सकता है। इनको पढ़कर सभी राजनेता बने यह जरूरी नहीं है पर जीवन में भी इनके मंत्रों का उपयोग कर सहज सफलता प्राप्त की जा सकती है। श्रीमद्भागवत गीता, पतंजलि योग साहित्य, कौटिल्य का अर्थशास्त्र और चाणक्य नीति ऐसी पावन रचनायें हैं जिनके अध्ययन से राजनीति ही नहीं बल्कि जीवन के गूढ़ रहस्यों का भी पता चलता हैं।

इन नौ दिनों में बाबा रामदेव के व्यक्त्तिव की पूरी गहराई का पता लग गया है। अभी तक योग तक ही सीमित होने के कारण वह देश के अनेक ऐसे योग साधकों और लेखकों के भी वह प्रिय रहे थे जो उनके शिष्य नहीं है। उस समय तक बाबा का व्यक्त्तिव उनके आभामंडल तथा लोगों के विश्वास के कारण ढंका हुआ था। अब इन नौ दिनों में बाबा रामदेव टीवी चैनलों और अखबारों में इतने छाये रहे हैं कि उनके वह समर्थक जो निष्पक्ष योग साधक और बुद्धिजीवी हैं उनके साथ जुड़े घटनाक्रमों के दौरान अन्य लोगों की क्रियाओं से अधिक स्वामी रामदेव पर अपना ध्यान केंद्रित किये हुए थे। बाबा रामदेव का चेहरा के हावभाव, हाथ पांव की क्रियायें और वाणी के स्वरों का अध्ययन वह लोग करते रहे जो उनके साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नहीं जुड़े हैं। इनमें से अनेक निराश भी हुए होंगे तो कुछ लोगों के चिंतन में बदलावा भी आया।
हम बाबा रामदेव के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं। एक स्वतंत्र लेखक तथा योग साधक होने के नाते हम तो यही चाहते हैं कि बाबा अपना योग शिक्षण अभियान जारी रखें। साथ ही यह भी बता दें कि योग शिक्षा से उनकी गतिविधियों में उनके योगाभ्यास का अगर सकारात्मक परिणाम नहीं दिखता, लोग उनकी योगशिक्षा में भी दोष ढूंढने लगेंगे जो अब तक नहीं हुआ था।

Sunday, June 12, 2011

वाह! रे देश का मीडिया देश की जनता को गुमराह करने की

स्वामी रामदेव पर मीडिया द्वारा दी जा रही कवरेज में ऐसा लगता है जैसे कांग्रेस की सरकार ने कई मीडिया चैनल को खरीद लिया हो, इसलिए चैनल वाले तो सिर्फ रामदेव जी की भूल तलास रहे हैं , उनके अनसन में हटयोग नज़र आ रहा है , एक आदमी नौ दिन से भूखा है और उस आदमी का साथ देने की बजाए पत्रकारों का कहना है के मजबूरी मैं तोडा अनसन, अरे क्या उस आदमी को मारने का इरादा है तुम्हारा, क्या वो अपने लिए अनसन पर गया था।
वाह! रे देश का मीडिया भ्रष्टाचार और काले धन के मामले पर भी तुम एक आदमी का साथ देने की बजाए सरकार के पीआरओ की तरह वयान देकर देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हो!

Thursday, June 9, 2011

बाबा रामदेव द्वारा सेना बनाने की बात कहने के बाद कांग्रेस सरकार बोखला गई है!

बाबा रामदेव द्वारा सेना बनाने की बात कहने के बाद कांग्रेस मामले को तूल दे रही है , इससे पहले भी इस देश में बजरंग दल और शिव सेना बनी हैं, इसका विरोध तो किसी ने नहीं किया , क्योंकि बाबा के हर कदम से कांग्रेस को अपने राजनेतिक करियर की चिंता होने लगी है , इसलिए पूरी कांग्रेस की सरकार बाबा के पीछे पड़ी है , इससे पहले सरकारने बाबा की ट्रस्ट की कोई जानकारी क्यों नही मागी । इस घटना के बाद बाबा ठग हो गए , इससे पहले दिग्गी जी को बाबा रामदेव में कोई खोट नजर नहीं आये , अब सरकार बोखला गई है , इस समय सरकार को फिजूल के सवाल खड़े करने की बजाए बाबा की मांगो को मानकर उनका अनसन तुडवाना चाहिए!
आज देश में सभी प्रतिष्ठान और बड़े ट्रस्ट अपनी व्यक्तिगत सिक्योरिटी रखते हैं ऐसे मैं अगर बाबा ऐसा करते हैं तो क्या गलत है?|
क्या बाबा अरुंधती, गिलानी से भी खतरनाक है ? क्या बाबा किसी आतंकवादी समूह से जुड़े हैं ?
ये सब सिर्फ और सिफ घटिया मानसिकता से प्रेरित कांग्रेसी चाटुकारों की उपज है जो जनता को मुद्दे से भटकाकर देश को गुमराह कर रही है |

Tuesday, June 7, 2011

दिल्ली के रामलीला मैदान में साधू और संतों पर हुए अत्याचार: सरकार ने पतन की ओर बढाया कदम

दिल्ली के रामलीला मैदान में साधू और संतों पर हुए अत्याचार ने भारत के संबिधान की स्वतंत्रतता को न सिर्फ शर्मसार किया है बल्कि द्वापर युग मैं मथुरा के राजा कंस द्वारा साधू और संतों पर किये गए अत्याचारों की याद तजा करा दी है ! लेकिन शायद सरकार ये भूल गई की उसका अंत स्यम भगवन श्री कृष्ण ने किया था!
त्रेता युग में रावन ने किये अत्याचारों की तुलनात्मक कारवाही की है ! याद रहे उस रावन का अंत भी भगवन श्री राम ने किया!
अर्थात जिसने भी अपने मद मैं चूर होकर साधू सन्यासियों पर अत्याचार किये शीघ्र ही उसका पतन हुआ है!
क्या अब लोकतंत्र में शांति पूर्वक तरीके से अपनी बात कहने का हक़ भी कांग्रेस की सरकार आम आदमी को नहीं देना चाहती !

Saturday, April 23, 2011

अगर स्वामी रामदेव बकई समाज सेवा और देश की सेवा करना चाहते हैं तो

अगर स्वामी रामदेव बकई समाज सेवा और देश की सेवा करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने कैंप मैं जन साधारण पर लगने वाले शुल्क को हटाएँ, इससे समाज मैं क्रांति आ जाएगी !
अगर वो ऐसा नहीं कर पते तो भारत की जनता उन पर कैसे विस्वास करेगी!
अगर उनके दिल मैं पैसा कमाने की नहीं शिर्फ़ योग की भावना है तो उनके कैंप का टिकेट १-५ हज़ार रूपये क्यों है! १० रूपये क्यों नहीं ?

आज देश का हर एक पोलिटिसियन अन्ना हजारे की तरह रातो रत चमकना चाहता है !

अन्ना हजारे की तरह आमरण अनसन करने के लिए अब स्वामी रामदेव भी मैदान में आना चाहते हैं !
ऐसा लगता है जैसे बाबा को लगा की उनके भ्रष्टाचार के मुद्दे को अन्ना जी ने छीन लिया हो !

Wednesday, July 21, 2010

भारत स्वाभिमान : क्या बाबा रामदेव घमंडी हो गए हैं ?

भारत स्वाभिमान: अगर बाबा रामदेव भारत स्वाभिमान ट्रस्ट को मजबूत करना चाहते हैं तो युवाओ को अपनी ट्रस्ट मैं मोका दे !
इसके साथ ही उन्हे योग की ट्रेनिंग देने की बजाए देश भक्ति से ओत प्रोत अध्यापन करना चाहिए!